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जिसने दुनियां से भिड़ने की ठानी नही


जिसने दुनियां से भिड़ने की ठानी नही।
उसकी सच में होती कोई कहानी नही।

 कब्रों में है कैद सिकंदर हिटलर सब,
 जिसने दुनिया जीती लेकिन जानी नही।

 लेकिन ये भी सच है दुनिया उनकी है,
 लीक छोड़ कर चले भीड़ की मानी नही।
  जिद़ जिनकी खूबी जीत बस उनकी है,
  मर जाना मंजूर मात तो खानी नही।
 राही खा ठोकर बेखोफ बढो आगे,
 मौत तो वैसे भी दोबारा आनी नही।

अपने गम अपनी खुशियाँ बस अपने है,
ये दुनियां तो रोनी या मुस्कानी नही।

दरिया क्या है पी जाऊं गर प्यास लगे,
मुश्किल कब तक जब तक हमने ठानी नही।

कहानी होती कुछ ऐसी जो मन को भाती है,
शहंशाह होते है जिसमें होती कोई रानी नही।

                               ✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'



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