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वक्त

 



जलते हुए दियों को मत बुझाया कर,

यूं तुफान की तरह मत आया कर।


हमनें कोशिशों में जान झोंक दी है,

इतनी बेरहमी से मत आजमाया कर।


सब कुछ नहीं होता है किस्मत में यहां,

अपनी मेहनत से  मुकद्दर बनाया कर।


हमको भी कहते थे सो हम कहते हैं,

ख़र्च करना है अगर तो कमाया कर।


आग तेरा कहर है तो बरपा बेशक,

बेगुनाहों को इसमें न जलाया कर।


जिंदगी अनमोल है जान लो 'शक्ति',

इश्क़ बाज़ी में इसे न जा़या कर।


दशरथ रांकावत 'शक्ति'



 




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