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शिव स्तुति



 नमामि सदाशिव नमामि भोला शंकर,

रहे शैल कैलाश बसो चाहे कंकर।

तुम्हीं नाथ बोलो भगत किसको ध्यावे,

कभी दीनबंधु कभी भट्ट भयंकर।


तुम्हारे गले वासुकी व्याल साजे,

सदा घंट डमरू दुंदुभी ही बाजे।  

नवांऊ में मस्तक या नांचू तरंग में,

तुम्हीं तन में मन में सदा से विराजे।


स्वयंभू त्रिलोचन महाकाल भोला,

चले आये दौड़े निभाने जो बोला। 

कभी दीन वत्सल कभी काल भैरव,

जटाजूट हर्षित है हर-हर जो बोला।


तुम्हारी शरण में मुझे कैसा भय हो,

जहां काल को भी महाकाल भय हो।

तुम्हारी कृपा जो कोई जीव पा ले,

फिर तो प्रलय में भी किंचित न क्षय हो।


✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'




Comments

  1. शिव जी का क्या गुनगान मन खुश हो गया

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बहुत धन्यवाद इस प्रोत्साहन के लिए

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