असलियत
झूठ इसलिए भी जीत जाता है आजकल अक्सर,
सच को सच बताने में झूठों का सहारा लगता है।
सलाह बिन मांगे मिलेगी मदद मांगने पर भी नहीं,
तभी मालूम चलता है हमारा है कि हमारा लगता है।
दो रोटी इज़्ज़त से महंगे जल्लादों से पूत यहां है,
लेकिन मां है जिसको फिर भी बेटा प्यारा लगता है।
जब तक मेहनत रंग ना लाये मेहनत कौन समझता है,
खुद बाबा को अपना बेटा बस आवारा लगता है।
दुनियां की जितनी दौड़े है सबका यही सलीका है,
जीत से बेश़क चूकें लेकिन दम तो सारा लगता है।
हार गये है मरे नहीं है आज नहीं तो कल जितेंगे,
गुमनामी का लेबल हमको बहुत गंवारा लगता है।
अनुभव भी दौलत होती है हार ने ये तो सिखलाया,
तख्त मिले अनुभव बिन जिसको बहुत बेचारा लगता है।
साहिल से तकने वाले को दरिया भला लगेगा 'शक्ति',
लेकिन भंवर फंसे मांझी को भला किनारा लगता है।
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'

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बहुत धन्यवाद इस प्रोत्साहन के लिए